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सुनन नसाई

नंबर 1778

नंबर 1778किताब 20, नंबर 181
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، قَالَ ابْنُ عُمَرَ أَخْبَرَتْنِي حَفْصَةُ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَرْكَعُ رَكْعَتَيْنِ قَبْلَ الْفَجْرِ وَذَلِكَ بَعْدَ مَا يَطْلُعُ الْفَجْرُ ‏.‏
Ibn Umar said:"Hafsah told me that the Messenger of Allah (ﷺ) used to pray two brief rak'ahs before Fajr, and that was after dawn had broken
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।