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सुनन नसाई

नंबर 1767

नंबर 1767किताब 20, नंबर 170
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ حَفْصَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَرْكَعُ بَيْنَ النِّدَاءِ وَالصَّلاَةِ رَكْعَتَيْنِ خَفِيفَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that Hafsah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) used to pray two brief rak'ahs between the call (the Adhan) and the prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।