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सुनन नसाई

नंबर 1688

नंबर 1688किताब 20, नंबर 91
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍ، قَالَ قَالَ لِي ابْنُ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُوتِرُ عَلَى الْبَعِيرِ ‏.‏
It was narrated that Sa'eed bin Yasir said:"Ibn Umar said to me that the Messenger of Allah (ﷺ) used to pray witr on a camel
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।