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सुनन नसाई

नंबर 1633

नंबर 1633किताब 20, नंबर 36
أَخْبَرَنِي أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَبَّانُ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ أَنْبَأَنَا ثَابِتٌ، وَسُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَرَرْتُ عَلَى قَبْرِ مُوسَى عَلَيْهِ السَّلاَمُ وَهُوَ يُصَلِّي فِي قَبْرِهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Anas that:The Prophet (ﷺ) said: "I passed by the grave of Musa, peace be upon him, and he was praying in his grave
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।