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सुनन नसाई

नंबर 1632

नंबर 1632किताब 20, नंबर 35
أَخْبَرَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ، وَثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَتَيْتُ عَلَى مُوسَى عَلَيْهِ السَّلاَمُ عِنْدَ الْكَثِيبِ الأَحْمَرِ وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذَا أَوْلَى بِالصَّوَابِ عِنْدَنَا مِنْ حَدِيثِ مُعَاذِ بْنِ خَالِدٍ وَاللَّهُ تَعَالَى أَعْلَمُ ‏.‏
It was narrated from Anas that :The Messenger of Allah (ﷺ) said: "I came to Musa at the red dune and he was standing and praying
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।