أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كُنْتُ أُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَكَانَتْ صَلاَتُهُ قَصْدًا وَخُطْبَتُهُ قَصْدًا .
It was narrated that Jabir bin Samurah said:"I used to pray with the Prophet (ﷺ) and his prayer was moderate in length and his Khutbah was moderate in length
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAbu Ghuddah
HasanAl-Albani
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।