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सुनन नसाई

नंबर 1568

नंबर 1568किताब 19, नंबर 13
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْتَشِرِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ سَالِمٍ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي الْعِيدَيْنِ وَيَوْمِ الْجُمُعَةِ بِـ ‏{‏ سَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الأَعْلَى ‏}‏ وَ{‏ هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ الْغَاشِيَةِ ‏}‏ وَرُبَّمَا اجْتَمَعَا فِي يَوْمٍ وَاحِدٍ فَيَقْرَأُ بِهِمَا ‏.‏
It was narrated from An-Nu'man bin Bashir that:The Messenger of Allah (ﷺ) used to recite on the two 'Eids and on Friday: "GLorify the Name of Your Lord, the Most High" and "Has there come to you the narration of The Overwhelming?" Sometimes the two ('Eid and Jumu'ah) occurred on the same day, and he would recite them (these two Surahs)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book of the Prayer for the Two 'Eids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।