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सुनन नसाई

नंबर 1453

नंबर 1453किताब 15, नंबर 21
أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الأَسْوَدِ الْبَصْرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَبِيعَةَ، عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ جَعْفَرٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عِرَاكِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَقَامَ بِمَكَّةَ خَمْسَةَ عَشَرَ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas that:The Messenger of Allah (ﷺ) stayed in Makkah (for fifteen days), praying each prayer with two rak'ahs
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Shortening the Prayer When Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।