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सुनन नसाई

नंबर 1443

नंबर 1443किताब 15, नंबर 11
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، فِي حَدِيثِهِ عَنْ خَالِدِ بْنِ الْحَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، قَالَ سَمِعْتُ مُوسَى، - وَهُوَ ابْنُ سَلَمَةَ - قَالَ قُلْتُ لاِبْنِ عَبَّاسٍ كَيْفَ أُصَلِّي بِمَكَّةَ إِذَا لَمْ أُصَلِّ فِي جَمَاعَةٍ قَالَ رَكْعَتَيْنِ سُنَّةَ أَبِي الْقَاسِمِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
It was narrated that Qatadah said:"I heard Muas- bin Salamah-say: 'I said to Ibn 'Abbas: How should I pray in Makkah if I do not pray in congregation? He said: Two rak'ahs, the sunnah of Abu Al-Qasim
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Shortening the Prayer When Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।