أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ الْحَسَنِ بْنِ شَقِيقٍ، قَالَ أَبِي أَنْبَأَنَا أَبُو حَمْزَةَ، - وَهُوَ السُّكَّرِيُّ - عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي السَّفَرِ رَكْعَتَيْنِ وَمَعَ أَبِي بَكْرٍ رَكْعَتَيْنِ وَمَعَ عُمَرَ رَكْعَتَيْنِ رضى الله عنهما .
It was narrated that 'Abdullah said:"I prayed two rak'ahs with the Messenger of Allah (ﷺ) on a journey, and two rak'ahs with Abu Bakr, and two rak'ahs with 'Umar, may Allah (SWT) be pleased with them both
स्रोत में दर्ज दर्जे
Sahih IsnaadAbu Ghuddah
Sahih IsnaadAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।