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सुनन नसाई

नंबर 1420

नंबर 1420किताब 14, नंबर 57
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ زُبَيْدٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، قَالَ قَالَ عُمَرُ صَلاَةُ الْجُمُعَةِ رَكْعَتَانِ وَصَلاَةُ الْفِطْرِ رَكْعَتَانِ وَصَلاَةُ الأَضْحَى رَكْعَتَانِ وَصَلاَةُ السَّفَرِ رَكْعَتَانِ تَمَامٌ غَيْرُ قَصْرٍ عَلَى لِسَانِ مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي لَيْلَى لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عُمَرَ ‏.‏
It was narrated from 'Abdur-Rahman bin Abi Laila that 'Umar said:"Jumu'ah prayer is two rak'ahs, and the prayer of Al-Fitr is two rak'ahs, and the prayer of Al-Adha is two rak'ahs, and the prayer when traveling is two rak'ahs, complete and not shortened, on the tongue of Muhammad (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।