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सुनन नसाई

नंबर 1419

नंबर 1419किताब 14, नंबर 56
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ مَيْمُونٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْفِرْيَابِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا جَرِيرُ بْنُ حَازِمٍ، عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَنْزِلُ عَنِ الْمِنْبَرِ فَيَعْرِضُ لَهُ الرَّجُلُ فَيُكَلِّمُهُ فَيَقُومُ مَعَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم حَتَّى يَقْضِيَ حَاجَتَهُ ثُمَّ يَتَقَدَّمُ إِلَى مُصَلاَّهُ فَيُصَلِّي ‏.‏
It was narrated that Anas said:"The Messenger of Allah (ﷺ) would come down from the minbar and a man would come to him and speak to him, then the Prophet (ﷺ) would listen to him until he gave him an answer, then he would go to his place of prayer and pray
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAbu Ghuddah
  • ShadhAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।