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सुनन नसाई

नंबर 1407

नंबर 1407किताब 14, नंबर 44
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ وَهُوَ قَائِمٌ عَلَى الْمِنْبَرِ ‏ "‏ مَنْ جَاءَ مِنْكُمُ الْجُمُعَةَ فَلْيَغْتَسِلْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ مَا أَعْلَمُ أَحَدًا تَابَعَ اللَّيْثَ عَلَى هَذَا الإِسْنَادِ غَيْرَ ابْنِ جُرَيْجٍ وَأَصْحَابُ الزُّهْرِيِّ يَقُولُونَ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ بَدَلَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ ‏.‏
It was narrated from 'Abdullah bin 'Abdullah (from 'Abdullah) Ibn 'Umar that:While he was standing on the minbar, the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Whoever among you comes (to prayer) on a Friday, let him perform ghusl
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।