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सुनन नसाई

नंबर 1406

नंबर 1406किताब 14, नंबर 43
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ نَشِيطٍ، أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍ عَنِ الْغُسْلِ، يَوْمَ الْجُمُعَةِ فَقَالَ سُنَّةٌ وَقَدْ حَدَّثَنِي بِهِ، سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم تَكَلَّمَ بِهَا عَلَى الْمِنْبَرِ ‏.‏
It was narrated from Ibrahim bin Nashit that:He asked Ibn Shihab about ghusl on Friday. He said: "It is a sunnah; Salim bin 'Abdullah told me, narrating from his father, that the Messenger of Allah (ﷺ) spoke about it from the minbar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।