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सुनन नसाई

नंबर 1390

नंबर 1390किताब 14, नंबर 27
أَخْبَرَنِي هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ آدَمَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ عَيَّاشٍ، قَالَ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْجُمُعَةَ ثُمَّ نَرْجِعُ فَنُرِيحُ نَوَاضِحَنَا ‏.‏ قُلْتُ أَيَّةَ سَاعَةٍ قَالَ زَوَالُ الشَّمْسِ ‏.‏
It was narrated that Ja'far bin Muhammad from his father, from Jabir bin 'Abdullah who said:"We used to pray Jumu'ah with the Messenger of Allah (ﷺ) then we would go back and tend to our camels." I said: " At what time?" He said: "When the sun had passed its zenith
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।