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सुनन नसाई

नंबर 1389

नंबर 1389किताब 14, नंबर 26
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ سَوَّادِ بْنِ الأَسْوَدِ بْنِ عَمْرٍو، وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ، قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنِ الْجُلاَحِ، مَوْلَى عَبْدِ الْعَزِيزِ أَنَّ أَبَا سَلَمَةَ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَهُ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَوْمُ الْجُمُعَةِ اثْنَتَا عَشْرَةَ سَاعَةً لاَ يُوجَدُ فِيهَا عَبْدٌ مُسْلِمٌ يَسْأَلُ اللَّهَ شَيْئًا إِلاَّ آتَاهُ إِيَّاهُ فَالْتَمِسُوهَا آخِرَ سَاعَةٍ بَعْدَ الْعَصْرِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Jabir bin 'Abdullah that:The Messenger of Allah (ﷺ) said: "Friday is twelve hours in which there is no Muslim slave who asks Allah (SWT) for something but He will give it to him, so seek it in the last hour after 'Asr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।