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सुनन नसाई

नंबर 1276

नंबर 1276किताब 13, नंबर 98
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ السَّرْحِ، عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي اللَّيْثُ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَيَنْتَهِيَنَّ أَقْوَامٌ عَنْ رَفْعِ أَبْصَارِهِمْ عِنْدَ الدُّعَاءِ فِي الصَّلاَةِ إِلَى السَّمَاءِ أَوْ لَتُخْطَفَنَّ أَبْصَارُهُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:The Messenger of Allah (ﷺ) said: "People should certainly stop lifting their gaze to the sky when they supplicate during the prayer, or they will lose their eyesight
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Forgetfulness (In Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।