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सुनन नसाई

नंबर 1273

नंबर 1273किताब 13, नंबर 95
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ الْمُخَرِّمِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ سَعْدٍ، قَالَ مَرَّ عَلَىَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَأَنَا أَدْعُو بِأَصَابِعِي فَقَالَ ‏ "‏ أَحِّدْ أَحِّدْ ‏"‏ ‏.‏ وَأَشَارَ بِالسَّبَّابَةِ ‏.‏
It was narrated from Sa`d who said:"The Messenger of Allah (ﷺ) passed by me when I was supplicating with my fingers and he said: 'Make it one, make it one' and pointed with his forefinger
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Forgetfulness (In Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।