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सुनन नसाई

नंबर 1247

नंबर 1247किताब 13, नंबर 69
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ كَانُوا يَقُولُونَ إِذَا أَوْهَمَ يَتَحَرَّى الصَّوَابَ ثُمَّ يَسْجُدُ سَجْدَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated that Ibrahim said:"They used to say: 'If one is not sure of what he estimates is correct, then prostrate twice
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih Isnaad MauqufAbu Ghuddah
  • Sahih Isnaad MauqufAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Forgetfulness (In Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।