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सुनन नसाई

नंबर 1148

नंबर 1148किताब 12, नंबर 120
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ أَبُو قُدَامَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ شُعْبَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي الْحَكَمُ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنِ الْبَرَاءِ، قَالَ كَانَ صَلاَةُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رُكُوعُهُ وَسُجُودُهُ وَقِيَامُهُ بَعْدَ مَا يَرْفَعُ رَأْسَهُ مِنَ الرُّكُوعِ وَبَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ قَرِيبًا مِنَ السَّوَاءِ ‏.‏
It was narrated that Al-Bara' said:"In the prayer of the Messenger of Allah (ﷺ), his bowing, his prostration, standing after he raised his head from bowing and (sitting) between the two prostrations, were almost the same
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।