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सुनन नसाई

नंबर 1088

नंबर 1088किताब 12, नंबर 60
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْكُوفِيُّ الْمُحَارِبِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَرْفَعُ يَدَيْهِ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلاَةَ وَإِذَا رَكَعَ وَإِذَا رَفَعَ وَكَانَ لاَ يَفْعَلُ ذَلِكَ فِي السُّجُودِ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Umar said:"The Messenger of Allah (ﷺ) used to raise his hands when he started to pray, and when he bowed, and when he stood up, but he did not do that when he prostrated
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।