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सुनन नसाई

नंबर 1072

नंबर 1072किताब 12, नंबर 44
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، قَالَ حَدَّثَنِي بَعْضُ، مَنْ صَلَّى مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلاَةَ الصُّبْحِ فَلَمَّا قَالَ ‏ "‏ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ‏"‏ ‏.‏ فِي الرَّكْعَةِ الثَّانِيَةِ قَامَ هُنَيْهَةً ‏.‏
It was narrated that Ibn Sirin said:"Some of those who prayed the Subh prayer with the Messenger of Allah (ﷺ) narrated to me that when he said: Sami'Allahu liman hamidah (Allah hears those who praise Him)' in the second rak'ah, he stood for a while
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।