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सुनन नसाई

नंबर 1033

नंबर 1033किताब 12, नंबर 5
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، عَنِ الزُّبَيْرِ بْنِ عَدِيٍّ، عَنْ مُصْعَبِ بْنِ سَعْدٍ، قَالَ رَكَعْتُ فَطَبَّقْتُ فَقَالَ أَبِي إِنَّ هَذَا شَىْءٌ كُنَّا نَفْعَلُهُ ثُمَّ ارْتَفَعْنَا إِلَى الرُّكَبِ ‏.‏
It was narrated that Mus'ab bin Sa'd said:"I bowed and put my hands together, and my father said: 'This is something that we used to do, then we brought them up to our knees
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।