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सुनन नसाई

नंबर 985

नंबर 985किताब 11, नंबर 110
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ الْمَاجِشُونُ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، عَنْ أُمِّ الْفَضْلِ بِنْتِ الْحَارِثِ، قَالَتْ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي بَيْتِهِ الْمَغْرِبَ فَقَرَأَ الْمُرْسَلاَتِ مَا صَلَّى بَعْدَهَا صَلاَةً حَتَّى قُبِضَ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
It was narrated from Anas that Umm Al-Fadl bint Al-Harith said:" The Messenger of Allah (ﷺ) led us in praying maghrib in his house and he recited Al-Mursalat, then after that, he never offered any prayer until he died
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।