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सुनन नसाई

नंबर 980

नंबर 980किताब 11, नंबर 105
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ فِي الظُّهْرِ ‏{‏ وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَى ‏}‏ وَفِي الْعَصْرِ نَحْوَ ذَلِكَ وَفِي الصُّبْحِ بِأَطْوَلَ مِنْ ذَلِكَ ‏.‏
It was narrated that Jabir bin Samurah said:"The Prophet (ﷺ) used to recite "By the night as it envelops" in Zuhr and something similar in 'Asr, and he would recite something longer than that in subh
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।