أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ بِالسَّمَاءِ ذَاتِ الْبُرُوجِ وَالسَّمَاءِ وَالطَّارِقِ وَنَحْوِهِمَا .
It was narrated from Jabir bin Samurah that :The Prophet (ﷺ) used to recite "By the heaven holding the big stars" and: "By the heaven, and At-Tariq (the night-comer, i.e. the bright star)" and similar surahs in Zuhr and 'Asr
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan SahihAbu Ghuddah
Hasan SahihAl-Albani
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।