أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، قَرَأَ بِهِمْ { إِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ } فَسَجَدَ فِيهَا فَلَمَّا انْصَرَفَ أَخْبَرَهُمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَجَدَ فِيهَا .
It was narrated from Abu Salamah bin Abdur- Rahman that:Abu Hurairah (led them in prayer and) recited: "When the heaven is split asunder." and prostrated during it. When he had finished praying, he told them that the Messenger of Allah (ﷺ) had prostrated during it
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।