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सुनन नसाई

नंबर 948

नंबर 948किताब 11, नंबर 73
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ، عَنْ سَيَّارٍ، - يَعْنِي ابْنَ سَلاَمَةَ - عَنْ أَبِي بَرْزَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي صَلاَةِ الْغَدَاةِ بِالسِّتِّينَ إِلَى الْمِائَةِ ‏.‏
It was narrated from Abu Barzah that:The Messenger of Allah (ﷺ) used to recite between sixty and one hundred verses in Al-Ghadah (Subh) prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।