أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الزُّهْرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَمَعَ أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ - رضى الله عنهما - فَافْتَتَحُوا بِـ { الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ }
It was narrated from Anas:"I prayed with the Prophet (ﷺ) and with Abu Bakr and Umar, may Allah be pleased with them both, and they started with "All the praise and thanks be to Allah, the Lord of all that exists
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।