सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2038

नंबर 2038किताब 7, नंबर 88अरबी नंबरिंग 881.03
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، ح وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، كِلاَهُمَا عَنْ سُهَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَنْ كَانَ مِنْكُمْ مُصَلِّيًا بَعْدَ الْجُمُعَةِ فَلْيُصَلِّ أَرْبَعًا ‏"‏ ‏.‏ وَلَيْسَ فِي حَدِيثِ جَرِيرٍ ‏"‏ مِنْكُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:When any one amongst you observes prayer after Jumu'a, he should observe four rak'ahs. (In the hadith transmitted by Jarir the word minkum is not recorded)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।