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सहीह मुस्लिम

नंबर 2035

नंबर 2035किताब 7, नंबर 85अरबी नंबरिंग 880.02
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، ‏.‏ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي الصُّبْحِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ بِـ ‏{‏ الم * تَنْزِيلُ‏}‏ فِي الرَّكْعَةِ الأُولَى وَفِي الثَّانِيَةِ ‏{‏ هَلْ أَتَى عَلَى الإِنْسَانِ حِينٌ مِنَ الدَّهْرِ لَمْ يَكُنْ شَيْئًا مَذْكُورًا‏}‏
Abu Huraira reported that the Messenger of Allah (ﷺ) used to recite in the dawn prayer on Friday:" Alif-Lam-Mim, Tanzil" in the first rak'ah, and in the second one:" Surely there came over the man a time when he was nothing that could be mentioned

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।