सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2034

नंबर 2034किताब 7, नंबर 84अरबी नंबरिंग 880.01
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَبْدِ، الرَّحْمَنِ الأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ أَنَّهُ كَانَ يَقْرَأُ فِي الْفَجْرِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ ‏{‏ الم * تَنْزِيلُ‏}‏ وَ ‏{‏ هَلْ أَتَى‏}‏
Abu Huraira reported that the Messenger of Allah (ﷺ) used to recite in the dawn prayer on Friday" Alif-Lam-Mim, Tanzil" and" Surely there came

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।