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सहीह मुस्लिम

नंबर 2031

नंबर 2031किताब 7, नंबर 81अरबी नंबरिंग 879.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ مُخَوَّلِ، بْنِ رَاشِدٍ عَنْ مُسْلِمٍ الْبَطِينِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي صَلاَةِ الْفَجْرِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ ‏{‏ الم * تَنْزِيلُ‏}‏ السَّجْدَةُ وَ ‏{‏ هَلْ أَتَى عَلَى الإِنْسَانِ حِينٌ مِنَ الدَّهْرِ‏}‏ وَأَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي صَلاَةِ الْجُمُعَةِ سُورَةَ الْجُمُعَةِ وَالْمُنَافِقِينَ ‏.‏
Ibn Abbas reported:The Apostle of Allah (ﷺ) used to recite in the morning prayer on Friday Surah" Alif-Lam-Mim, Tanz'il ul-Sajda" (Surah xxxii.): Surely there came over the man a time" (Surah lxxvii) and he used to recite in Jumu'a prayer Surahs Jumu'a and al-Munafiqin

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।