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सहीह मुस्लिम

नंबर 1996

नंबर 1996किताब 7, नंबर 46अरबी नंबरिंग 862.02
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ، عَنْ سِمَاكٍ، قَالَ أَنْبَأَنِي جَابِرُ بْنُ، سَمُرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَخْطُبُ قَائِمًا ثُمَّ يَجْلِسُ ثُمَّ يَقُومُ فَيَخْطُبُ قَائِمًا فَمَنْ نَبَّأَكَ أَنَّهُ كَانَ يَخْطُبُ جَالِسًا فَقَدْ كَذَبَ فَقَدْ وَاللَّهِ صَلَّيْتُ مَعَهُ أَكْثَرَ مِنْ أَلْفَىْ صَلاَةٍ
Jabir b. Samura said that the Messenger of Allah (ﷺ) used to deliver the sermon while standing. He would then sit down and then stand up and address in a standing posture; and whoever informed you that he (the Holy Prophet) delivered the sermon while sitting told a lie. By Allah. I prayed with him more than two thousand times

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।