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सहीह मुस्लिम

नंबर 1995

नंबर 1995किताब 7, नंबर 45अरबी नंबरिंग 862.01
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَحَسَنُ بْنُ الرَّبِيعِ، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كَانَتْ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم خُطْبَتَانِ يَجْلِسُ بَيْنَهُمَا يَقْرَأُ الْقُرْآنَ وَيُذَكِّرُ النَّاسَ ‏.‏
Jabir b. Samura said:The Apostle of Allah (ﷺ) gave two sermons between which he sat, recited the Qur'an and exhorted the people

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।