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सहीह मुस्लिम

नंबर 1844

नंबर 1844किताब 6, नंबर 272अरबी नंबरिंग 791
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بَرَّادٍ الأَشْعَرِيُّ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ بُرَيْدٍ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ تَعَاهَدُوا هَذَا الْقُرْآنَ فَوَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ بِيَدِهِ لَهُوَ أَشَدُّ تَفَلُّتًا مِنَ الإِبِلِ فِي عُقُلِهَا ‏"‏ ‏.‏ وَلَفْظُ الْحَدِيثِ لاِبْنِ بَرَّادٍ
Abu Musa al-Ash'ari reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:Keep refreshing your knowledge of the Qur'an, for I swear by Him in Whose Hand is the life of Mahammad that it is more liable to escape than camels which are hobbled

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।