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सहीह मुस्लिम

नंबर 1626

नंबर 1626किताब 6, नंबर 57अरबी नंबरिंग 704.02
وَحَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا شَبَابَةُ بْنُ سَوَّارٍ الْمَدَايِنِيُّ، حَدَّثَنَا لَيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ عُقَيْلِ بْنِ خَالِدٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَرَادَ أَنْ يَجْمَعَ بَيْنَ الصَّلاَتَيْنِ فِي السَّفَرِ أَخَّرَ الظُّهْرَ حَتَّى يَدْخُلَ أَوَّلُ وَقْتِ الْعَصْرِ ثُمَّ يَجْمَعُ بَيْنَهُمَا ‏.‏
Anas reported:When the Messenger of Allah (ﷺ) intended to combine two prayers on a journey, he delayed the noon prayer till came the early time of the afternoon prayer, and then combined the two

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।