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सहीह मुस्लिम

नंबर 1623

नंबर 1623किताब 6, नंबर 54अरबी नंबरिंग 703.03
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَمْرٌو النَّاقِدُ كُلُّهُمْ عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، - قَالَ عَمْرٌو حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، - عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَجْمَعُ بَيْنَ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ إِذَا جَدَّ بِهِ السَّيْرُ ‏.‏
Salim reported from his father to be saying:I saw the Messenger of Allah (ﷺ) combining the sunset and Isha' prayers when he was in a hurry on a journey

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।