सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7542

नंबर 7542किताब 56, नंबर 20अरबी नंबरिंग 3023.02
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا النَّضْرُ، قَالاَ جَمِيعًا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ فِي حَدِيثِ ابْنِ جَعْفَرٍ نَزَلَتْ فِي آخِرِ مَا أُنْزِلَ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ النَّضْرِ إِنَّهَا لَمِنْ آخِرِ مَا أُنْزِلَتْ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Shu'ba with the same chain of narrators but with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · The Book of Commentary on the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।