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सहीह मुस्लिम

नंबर 7541

नंबर 7541किताब 56, नंबर 19अरबी नंबरिंग 3023.01
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ النُّعْمَانِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، قَالَ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْكُوفَةِ فِي هَذِهِ الآيَةِ ‏{‏ وَمَنْ يَقْتُلْ مُؤْمِنًا مُتَعَمِّدًا فَجَزَاؤُهُ جَهَنَّمُ‏}‏ فَرَحَلْتُ إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ فَسَأَلْتُهُ عَنْهَا فَقَالَ لَقَدْ أُنْزِلَتْ آخِرَ مَا أُنْزِلَ ثُمَّ مَا نَسَخَهَا شَىْءٌ ‏.‏
Sa'id b. Jubair reported:The inhabitants of Kufa differed in regard to this verse:" But whoever slays another believer intentionally, his requital shall be Hell" (iv. 92), so I went to Ibn 'Abbas and asked him about it, whereupon he said: This has been revealed and nothing abrogated it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · The Book of Commentary on the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।