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सहीह मुस्लिम

नंबर 7404

नंबर 7404किताब 54, नंबर 165अरबी नंबरिंग 2951.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ بُعِثْتُ أَنَا وَالسَّاعَةُ كَهَاتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ شُعْبَةُ وَسَمِعْتُ قَتَادَةَ يَقُولُ فِي قَصَصِهِ كَفَضْلِ إِحْدَاهُمَا عَلَى الأُخْرَى فَلاَ أَدْرِي أَذَكَرَهُ عَنْ أَنَسٍ أَوْ قَالَهُ قَتَادَةُ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Messenger (way peace be upon him) said:I and the Last Hour have been sent like this. Shu'ba said: I heard Qatada as saying in his narration: The excellence of one over the other. And I do not know whether he narrated it from Anas or Qatada himself said so

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।