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सहीह मुस्लिम

नंबर 7403

नंबर 7403किताब 54, नंबर 164अरबी नंबरिंग 2950
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، وَعَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي، حَازِمٍ عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، أَنَّهُ سَمِعَ سَهْلاً، يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يُشِيرُ بِإِصْبَعِهِ الَّتِي تَلِي الإِبْهَامَ وَالْوُسْطَى وَهُوَ يَقُولُ ‏ "‏ بُعِثْتُ أَنَا وَالسَّاعَةُ هَكَذَا ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been reported by Sahl b. Sa'd that he heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying:I and the Last Hour are (close to each other) like this (and he, in order to explain it) pointed (by joining his) forefinger, (one) next to the thumb and the middle finger (together)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।