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सहीह मुस्लिम

नंबर 7392

नंबर 7392किताब 54, नंबर 153अरबी नंबरिंग 2944
حَدَّثَنَا مَنْصُورُ بْنُ أَبِي مُزَاحِمٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ إِسْحَاقَ، بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَمِّهِ، أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَتْبَعُ الدَّجَّالَ مِنْ يَهُودِ أَصْبَهَانَ سَبْعُونَ أَلْفًا عَلَيْهِمُ الطَّيَالِسَةُ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:The Dajjal would be followed by seventy thousand Jews of Isfahan wearing Persian shawls

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।