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सहीह मुस्लिम

नंबर 7318

नंबर 7318किताब 54, नंबर 83अरबी नंबरिंग 2914
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا بِشْرٌ يَعْنِي ابْنَ الْمُفَضَّلِ، ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ، بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ - كِلاَهُمَا عَنْ سَعِيدِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مِنْ خُلَفَائِكُمْ خَلِيفَةٌ يَحْثُو الْمَالَ حَثْيًا لاَ يَعُدُّهُ عَدَدًا ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ حُجْرٍ ‏"‏ يَحْثِي الْمَالَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa'id reported that Allah's Messenger (may peace he upon him) I said:There would be amongst your caliphs a caliph who would give handfuls of wealth to the people, but would not count it. In the narration transmitted on the authority of Ibn Hujr, there is a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।