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सहीह मुस्लिम

नंबर 7303

नंबर 7303किताब 54, नंबर 69अरबी नंबरिंग 2908.01
وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ الْمَكِّيُّ، حَدَّثَنَا مَرْوَانُ، عَنْ يَزِيدَ، - وَهُوَ ابْنُ كَيْسَانَ - عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَيَأْتِيَنَّ عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ لاَ يَدْرِي الْقَاتِلُ فِي أَىِّ شَىْءٍ قَتَلَ وَلاَ يَدْرِي الْمَقْتُولُ عَلَى أَىِّ شَىْءٍ قُتِلَ ‏"‏ ‏.‏
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को पता नहीं होगा कि उसे किस बात पर क़त्ल किया गया।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।