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सहीह मुस्लिम

नंबर 7290

नंबर 7290किताब 54, नंबर 56अरबी नंबरिंग 2903
حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا الأَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي، صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ تَبْلُغُ الْمَسَاكِنُ إِهَابَ أَوْ يَهَابَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ زُهَيْرٌ قُلْتُ لِسُهَيْلٍ فَكَمْ ذَلِكَ مِنَ الْمَدِينَةِ قَالَ كَذَا وَكَذَا مِيلاً ‏.‏
Abu Huraira reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:(The Last Hour would not come) until the habitations of Medina would extend to Ihab or Yahab. Zubair said: I said to Suhail how far these were from Medina. He said: So and so miles

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।