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सहीह मुस्लिम

नंबर 7079

नंबर 7079किताब 52, नंबर 34अरबी नंबरिंग 2803
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ قُرَيْشٍ التَّمِيمِيُّ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ بَكْرِ بْنِ مُضَرَ، حَدَّثَنِي أَبِي، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ رَبِيعَةَ، عَنْ عِرَاكِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ إِنَّ الْقَمَرَ انْشَقَّ عَلَى زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Ibn 'Abbas reported that the moon was split up during the lifetime of Allah's Messenger (may peace he upon him)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 52 · Characteristics of the Day of Judgment, Paradise, and Hell

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।