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सहीह मुस्लिम

नंबर 6972

नंबर 6972किताब 50, नंबर 20अरबी नंबरिंग 2752.01
حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى التُّجِيبِيُّ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ جَعَلَ اللَّهُ الرَّحْمَةَ مِائَةَ جُزْءٍ فَأَمْسَكَ عِنْدَهُ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ وَأَنْزَلَ فِي الأَرْضِ جُزْءًا وَاحِدًا فَمِنْ ذَلِكَ الْجُزْءِ تَتَرَاحَمُ الْخَلاَئِقُ حَتَّى تَرْفَعَ الدَّابَّةُ حَافِرَهَا عَنْ وَلَدِهَا خَشْيَةَ أَنْ تُصِيبَهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying: Allah created mercy in one hundred parts and He retained with Him ninety-nine parts, and He has sent down upon the earth one part, and it is because of this one part that there is mutual love among the creation so much so that the animal lifts up its hoof from its young one, fearing that it might harm it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।