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सहीह मुस्लिम

नंबर 6964

नंबर 6964किताब 50, नंबर 12अरबी नंबरिंग 2748.02
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنِي عِيَاضٌ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْفِهْرِيُّ - حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ عُبَيْدِ بْنِ رِفَاعَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ الْقُرَظِيِّ، عَنْ أَبِي صِرْمَةَ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ لَوْ أَنَّكُمْ لَمْ تَكُنْ لَكُمْ ذُنُوبٌ يَغْفِرُهَا اللَّهُ لَكُمْ لَجَاءَ اللَّهُ بِقَوْمٍ لَهُمْ ذُنُوبٌ يَغْفِرُهَا لَهُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Ayyub Ansari reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:If you were not to commit sins, Allah would have swept you out of existence and would have replaced you by another people who have committed sin, and then asked forgiveness from Allah, and He would have granted them pardon

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।