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सहीह मुस्लिम

नंबर 6963

नंबर 6963किताब 50, नंबर 11अरबी नंबरिंग 2748.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ قَيْسٍ، - قَاصِّ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ - عَنْ أَبِي صِرْمَةَ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ، أَنَّهُ قَالَ حِينَ حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ كُنْتُ كَتَمْتُ عَنْكُمْ شَيْئًا سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لَوْلاَ أَنَّكُمْ تُذْنِبُونَ لَخَلَقَ اللَّهُ خَلْقًا يُذْنِبُونَ يَغْفِرُ لَهُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Sirma reported that when the time of the death of Abu Ayyub Ansari drew near, he said:I used to conceal from you a thing which I heard from Allah's Messenger (ﷺ) and I heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying: Had you not committed sins, Allah would have brought into existence a creation that would have committed sin (and Allah) would have forgiven them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।